Question:

देख-देख नाचता हृदय बहने को महाविकल-बेकल, इस मरोर से - इसी शोर से सघन घोर गुरु गहन रोर से मुझे गगन का दिखा सघन वह छोर राग अमर! अंबर में भर निज रोर।
(ख) रेखांकित अंश ('देख-देख नाचता हृदय बहने को महाविकल-बेकल') की व्याख्या कीजिए।

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

व्याख्या:
बादलों की गर्जना और आकाश की हलचल को देखकर कवि का हृदय स्वयं भी नाचने-सा (उद्वेलित होने) लगता है; वह प्रकृति की इस उमंग में बह जाने के लिए अत्यंत व्याकुल और बेचैन हो उठता है — यह पंक्ति कवि-हृदय और प्रकृति की गतिशीलता के तादात्म्य को व्यक्त करती है।
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