व्याख्या: बादलों की गर्जना और आकाश की हलचल को देखकर कवि का हृदय स्वयं भी नाचने-सा (उद्वेलित होने) लगता है; वह प्रकृति की इस उमंग में बह जाने के लिए अत्यंत व्याकुल और बेचैन हो उठता है — यह पंक्ति कवि-हृदय और प्रकृति की गतिशीलता के तादात्म्य को व्यक्त करती है।