झूमने लगे फल,
रस अलौकिक
अमृत धाराएँ फूटतीं
रोपाई क्षण की,
कटाई अनंतता की
लुटते रहने से जरा भी नहीं कम होती।
रस का अक्षय पात्र सदा का
छोटा मेरा खेत चौकोना।
कवि-कर्म की दृष्टि से ‘झूमने लगे फल’ का आशय है :
निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए पद्यांश के अनुसार सही कथन को चयनित कर लिखिए :
काव्यांश में ‘अलौकिक’ से तात्पर्य है :
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए :
कथन : काव्यानंद जितना ही बँटता है उतना ही बढ़ता जाता है।
कारण : साहित्य-सृजन प्राणिमात्र के मंगल के लिए है, काव्यानंद का वितरण लोक के आनंद का संवर्धन है।
विकल्प :
‘रस का अक्षय पात्र’ किसे कहा गया है ?