Comprehension

जाड़े का दिन। अमावस्या की रात – ठंडी और काली। मलेरिया और हैज़े से पीड़ित गाँव भयार्त्त शिशु की तरह थर-थर काँप रहा था। पुरानी और उजड़ी बाँस-फूस की झोपड़ियों में अंधकार और सन्नाटे का सम्मिलित साम्राज्य ! अँधेरा और निस्तब्धता !

अँधेरी रात चुपचाप आँसू बहा रही थी। निस्तब्धता करुण सिसकियों और आहों को बलपूर्वक अपने हृदय में ही दबाने की चेष्टा कर रही थी। आकाश में तारे चमक रहे थे। पृथ्वी पर कहीं प्रकाश का नाम नहीं। आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिलाकर हँस पड़ते थे।

Question: 1

गद्यांश में प्रयुक्त ‘भयार्त्त’ शब्द का अर्थ है :

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शब्द को 'भय' और 'आर्त्त' में तोड़िए। 'आर्त्त' का अर्थ पीड़ित होता है।
  • भीषण
  • भय से पीड़ित
  • भयंकर
  • भयानक
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: शब्द-रचना:
'भयार्त्त' शब्द 'भय' और 'आर्त्त' के मेल से बना है (भय + आर्त्त, दीर्घ संधि)।
'आर्त्त' का अर्थ है - दुखी या पीड़ित।
इस प्रकार 'भयार्त्त' का अर्थ हुआ - भय से पीड़ित।

चरण 2: गद्यांश में प्रयोग:
फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी 'पहलवान की ढोलक' के इस अंश में लिखा है - 'गाँव भयार्त्त शिशु की तरह थर-थर काँप रहा था।'
डर से पीड़ित बच्चा ही थर-थर काँपता है, इसलिए यह अर्थ प्रसंग में ठीक बैठता है।

चरण 3: अन्य विकल्प:
'भीषण', 'भयंकर' और 'भयानक' - ये तीनों डर पैदा करने वाली वस्तु के लिए आते हैं, डरे हुए व्यक्ति के लिए नहीं।
इसलिए विकल्प 1, 3 और 4 गलत हैं।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 2 - भय से पीड़ित।
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Question: 2

गद्यांश का केन्द्रीय भाव है :

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देखिए कि रात और अँधेरे का वर्णन किस बात को उभारने के लिए किया गया है।
  • गाँव की प्रकृति का चित्रण
  • गाँव की रात्रि का चित्रण
  • भूख और महामारी से दम तोड़ रहे गाँव की दयनीय दशा का चित्रण
  • गाँव में व्याप्त नीरवता का चित्रण
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह गद्यांश फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी 'पहलवान की ढोलक' का आरंभिक अंश है।
इसमें मलेरिया और हैज़े से पीड़ित गाँव की एक ठंडी, अँधेरी रात का वर्णन है।

चरण 2: मुख्य भाव खोजिए:
गद्यांश में 'मलेरिया और हैज़े से पीड़ित गाँव', 'उजड़ी झोपड़ियाँ', 'करुण सिसकियाँ और आहें' जैसे शब्द आए हैं।
रात, तारे और अँधेरे का वर्णन केवल गाँव की पीड़ा को गहरा करने के लिए है।
अतः केंद्रीय भाव महामारी से दम तोड़ रहे गाँव की दयनीय दशा का चित्रण है।

चरण 3: अन्य विकल्प:
'प्रकृति का चित्रण' (विकल्प 1), 'रात्रि का चित्रण' (विकल्प 2) और 'नीरवता का चित्रण' (विकल्प 4) गद्यांश के अंश मात्र हैं।
ये पूरे गद्यांश के केंद्रीय भाव को नहीं बताते।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 3 - भूख और महामारी से दम तोड़ रहे गाँव की दयनीय दशा का चित्रण।
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Question: 3

निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए गद्यांश के अनुसार सही कथन को चयनित कर लिखिए :

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टूटते हुए भावुक तारे की ज्योति धरती तक क्यों नहीं पहुँचती, इस पंक्ति पर ध्यान दें।
  • महामारी और आर्थिक तंगी की त्रासदी से जूझती ग्राम-बस्ती में आशा-किरण का आश्रय व्यर्थ प्रयास है।
  • महामारी और आर्थिक तंगी की त्रासदी से जूझती ग्राम-बस्ती आशा-निराशा के भाव में झूल रही है।
  • महामारी और आर्थिक तंगी से जूझती ग्राम-बस्ती में ग्रामीण एक दूसरे की सहायता कर रहे हैं।
  • महामारी और आर्थिक तंगी से जूझती ग्राम-बस्ती अपनी स्थिति से संतुष्ट है।
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग समझें:
यह गद्यांश फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ (आरोह भाग 2) से लिया गया है।
इसमें मलेरिया और हैज़े से पीड़ित गाँव की जाड़े की अमावस्या वाली रात का वर्णन है।
पूरा वातावरण अंधकार, सन्नाटे और निराशा से भरा हुआ है।

चरण 2: गद्यांश की मुख्य पंक्ति देखें:
गद्यांश में लिखा है कि यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी।
तारा आशा की किरण का प्रतीक है।
उसकी रोशनी गाँव तक पहुँच ही नहीं पाती, अर्थात आशा का सहारा लेना व्यर्थ प्रयास सिद्ध होता है।

चरण 3: अन्य विकल्पों की जाँच:
विकल्प 2 गलत है, क्योंकि गद्यांश में आशा और निराशा के बीच झूलने का भाव नहीं, केवल गहरी निराशा है।
विकल्प 3 गलत है, क्योंकि गद्यांश में ग्रामीणों द्वारा एक-दूसरे की सहायता का कोई वर्णन नहीं है।
विकल्प 4 गलत है, क्योंकि करुण सिसकियों और आहों से भरा गाँव अपनी स्थिति से संतुष्ट नहीं हो सकता।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 1 – महामारी और आर्थिक तंगी की त्रासदी से जूझती ग्राम-बस्ती में आशा-किरण का आश्रय व्यर्थ प्रयास है।
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Question: 4

प्रकृति को आँसू बहाते हुए क्यों दिखाया गया है ?

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रात का आँसू बहाना मानवीकरण है, सोचें यह किसके दुख से जुड़ा है।
  • काव्यात्मक रूप में प्रकृति सौंदर्य व्यक्त करने हेतु
  • गाँव वालों के दुख में प्रकृति को दुखी दिखाने हेतु
  • गाँव में व्याप्त सन्नाटे और अंधकार का वर्णन करने हेतु
  • प्रकृति की विवशता और असमर्थता को प्रकट करने हेतु
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग समझें:
यह अंश फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ से है।
गाँव मलेरिया और हैज़े की महामारी से पीड़ित है और लोग मर रहे हैं।
लेखक ने प्रकृति का मानवीकरण करके उसे भी दुखी दिखाया है।

चरण 2: गद्यांश की पंक्ति:
‘अँधेरी रात चुपचाप आँसू बहा रही थी।’
‘निस्तब्धता करुण सिसकियों और आहों को बलपूर्वक अपने हृदय में ही दबाने की चेष्टा कर रही थी।’
इन पंक्तियों में रात गाँव वालों के दुख में साथ रोती हुई दिखाई गई है।

चरण 3: अन्य विकल्प क्यों गलत:
विकल्प 1 गलत है, क्योंकि यहाँ प्रकृति का सौंदर्य नहीं, उसका करुण रूप दिखाया गया है।
विकल्प 3 में केवल सन्नाटे और अंधकार का वर्णन है, जबकि आँसू बहाना दुख का भाव है।
विकल्प 4 गलत है, क्योंकि आँसू बहाने का अर्थ यहाँ विवशता नहीं, सहानुभूति और शोक है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 2 – गाँव वालों के दुख में प्रकृति को दुखी दिखाने हेतु।
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Question: 5

स्तंभ-I को स्तंभ-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए :

स्तंभ-Iस्तंभ-II
1.अमावस्या की रात – ठंडी और काली(i)आशा एवं जिजीविषा का अभाव
2.प्रकाश का नाम नहीं(ii)पीड़ित गाँव वालों की मदद न कर पाना
3.तारे की शक्ति और ज्योति रास्ते में ही शेष हो जाती(iii)निराशापूर्ण परिवेश

विकल्प :

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पहले तारे वाले कथन का मेल ढूँढें, फिर प्रकाश को आशा का प्रतीक मानकर बाकी मिलाएँ।
  • 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
  • 1-(i), 2-(ii), 3-(iii)
  • 1-(ii), 2-(iii), 3-(i)
  • 1-(iii), 2-(ii), 3-(i)
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: पहला कथन:
‘अमावस्या की रात – ठंडी और काली’ पूरे वातावरण को अंधकारमय और उदास बनाती है।
यह निराशापूर्ण परिवेश का चित्र है।
अतः 1 का मेल (iii) से होगा।

चरण 2: दूसरा कथन:
‘पृथ्वी पर कहीं प्रकाश का नाम नहीं’ में प्रकाश आशा का प्रतीक है।
प्रकाश न होने का अर्थ है कि गाँव में आशा और जीने की इच्छा (जिजीविषा) का अभाव है।
अतः 2 का मेल (i) से होगा।

चरण 3: तीसरा कथन:
भावुक तारा धरती पर आना चाहता है, पर उसकी शक्ति और ज्योति रास्ते में ही समाप्त हो जाती है।
इसका भाव है कि वह पीड़ित गाँव वालों की मदद नहीं कर पाता।
अतः 3 का मेल (ii) से होगा।

चरण 4: विकल्प चुनें:
सही क्रम 1-(iii), 2-(i), 3-(ii) है, जो विकल्प 1 में है।
विकल्प 2, 3 और 4 में कम से कम एक मेल गलत है, जैसे विकल्प 4 में 2-(ii) और 3-(i) उलटे हैं।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 1 – 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)।
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