जाड़े का दिन। अमावस्या की रात – ठंडी और काली। मलेरिया और हैज़े से पीड़ित गाँव भयार्त्त शिशु की तरह थर-थर काँप रहा था। पुरानी और उजड़ी बाँस-फूस की झोपड़ियों में अंधकार और सन्नाटे का सम्मिलित साम्राज्य ! अँधेरा और निस्तब्धता !
अँधेरी रात चुपचाप आँसू बहा रही थी। निस्तब्धता करुण सिसकियों और आहों को बलपूर्वक अपने हृदय में ही दबाने की चेष्टा कर रही थी। आकाश में तारे चमक रहे थे। पृथ्वी पर कहीं प्रकाश का नाम नहीं। आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिलाकर हँस पड़ते थे।
गद्यांश में प्रयुक्त ‘भयार्त्त’ शब्द का अर्थ है :
गद्यांश का केन्द्रीय भाव है :
निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए गद्यांश के अनुसार सही कथन को चयनित कर लिखिए :
प्रकृति को आँसू बहाते हुए क्यों दिखाया गया है ?
स्तंभ-I को स्तंभ-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए :
| स्तंभ-I | स्तंभ-II | ||
|---|---|---|---|
| 1. | अमावस्या की रात – ठंडी और काली | (i) | आशा एवं जिजीविषा का अभाव |
| 2. | प्रकाश का नाम नहीं | (ii) | पीड़ित गाँव वालों की मदद न कर पाना |
| 3. | तारे की शक्ति और ज्योति रास्ते में ही शेष हो जाती | (iii) | निराशापूर्ण परिवेश |
विकल्प :