Question:

गद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए: "विज्ञान और उद्यम दोनों को मिलाकर राष्ट्र के भौतिक स्वरूप का एक नया ठाट खड़ा करना है। यह कार्य प्रसन्नता, उत्साह और अथक परिश्रम द्वारा नित्य आगे बढ़ाना चाहिए। हमारा यह ध्येय है कि राष्ट्र में जितने हाथ हैं, उनमें से कोई भी इस कार्य में भाग लिये बिना रीता न रहे। तभी मातृभूमि की पुष्कल समृद्धि और समग्र रूपमंडन प्राप्त किया जा सकता है।" (क) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ एवं लेखक के नाम लिखिए। (ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (ग) 'रीता' और 'पुष्कल' शब्दों के अर्थ लिखिए। (घ) मातृभूमि की पुष्कल समृद्धि किस प्रकार प्राप्त की जा सकती है? (ङ) हमारा क्या ध्येय है?

Updated On: Sep 23, 2026
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

Step 1: पाठ एवं लेखक:
यह गद्यांश राष्ट्र-निर्माण में विज्ञान और उद्यम की भूमिका पर केन्द्रित एक प्रेरक निबन्धांश है; (टिप्पणी: मूल पाठ का सटीक नाम/लेखक निर्धारित पाठ्यपुस्तक से सत्यापित किया जाना चाहिए)।

Step 2: रेखांकित अंश की व्याख्या:
लेखक कहना चाहता है कि यह कार्य सुस्ती से नहीं, बल्कि उत्साह, प्रसन्नता और निरन्तर परिश्रम से ही आगे बढ़ाया जा सकता है — राष्ट्र-निर्माण एक सतत प्रक्रिया है।

Step 3: शब्दार्थ:
'रीता' का अर्थ है खाली/बिना योगदान के, और 'पुष्कल' का अर्थ है प्रचुर/अत्यधिक।

Step 4: समृद्धि कैसे प्राप्त हो:
जब राष्ट्र का प्रत्येक हाथ (नागरिक) विज्ञान और उद्यम के कार्य में प्रसन्नतापूर्वक और अथक परिश्रम से भाग ले, तभी मातृभूमि की पुष्कल समृद्धि सम्भव है।

Final Answer:
हमारा ध्येय है कि राष्ट्र का कोई भी नागरिक राष्ट्र-निर्माण के कार्य में योगदान दिये बिना निष्क्रिय न रहे।
Was this answer helpful?
0
0

Top UP Board XII अपठित गद्यांश Questions

View More Questions