भारतीय संस्कृति के प्रति निष्ठा लेकर चलने वाले भी कुछ राजनीतिक दल हैं । किन्तु वे भारतीय संस्कृति की समानता को उसकी गतिहीनता समझ बैठे हैं और इसलिए बीते युग की रूढ़ियों अथवा यथास्थिति का समर्थन करते हैं । संस्कृति के क्रांतिकारी तत्त्व की ओर उसकी दृष्टि नहीं जाती । वास्तव में समाज में प्रचलित अनेक कुरीतियाँ जैसे – छुआछूत, जाति-भेद, दहेज, मृत्युभोज, नारी-अवमानना आदि भारतीय संस्कृति और समाज के स्वास्थ्य के सूचक नहीं बल्कि रोग के लक्षण हैं । भारत के अनेक महापुरुष, जिनकी भारतीय परम्परा और संस्कृति के प्रति अनन्य निष्ठा थी, इन बुराइयों के विरुद्ध लड़े हैं ।
प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक के नाम का उल्लेख कीजिए।
भारतीय संस्कृति के प्रति किसे निष्ठा है?
भारतीय संस्कृति के प्रति किसे निष्ठा है?
समाज में प्रचलित किन-किन कुरीतियों का उल्लेख किया गया है?
कौन से तत्त्व स्वस्थ समाज के सूचक नहीं हैं?