Question:

निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए: "बाँध लेंगे क्या तुझे यह भोग के बंधन सजीले। पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले? विश्व का क्रंदन भुला देगी मधुप की मधुर गुनगुन क्या डुबा देंगे, तुझे यह फूल के दल ओस गीले तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना। जाग तुझको दूर जाना।" (क) उपर्युक्त पद्यांश के पाठ और रचयिता का नाम लिखिए। (ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (ग) 'क्रंदन' और 'कारा' शब्दों के अर्थ लिखिए। (घ) इन पंक्तियों में कवयित्री किसको जागने की बात कह रही हैं? (ङ) इन पंक्तियों में कवयित्री किन-किन चीजों से दूर रहने की बात कह रही हैं?

Updated On: Sep 23, 2026
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

Step 1: पाठ और रचयिता:
छायावादी शैली, स्त्रीलिंग सम्बोधन ('कवयित्री') तथा आत्मा को भोग-विलास से जगाने के भाव से यह अंश महादेवी वर्मा की काव्य-शैली से मेल खाता प्रतीत होता है (मूल पाठ्यपुस्तक से सत्यापन अनुशंसित)।

Step 2: व्याख्या:
कवयित्री आत्मा/मन को चेताती हैं कि सांसारिक भोग-विलास के सुन्दर किन्तु बन्धनकारी आकर्षण, फूलों की सुगंध और भ्रमर की गुंजार में उलझकर अपने वास्तविक लक्ष्य को न भूल जाना — अभी बहुत दूर जाना शेष है।

Step 3: शब्दार्थ:
क्रंदन = रोना/विलाप; कारा = बन्दीगृह/कैद।

Step 4: सम्बोधन:
कवयित्री अपने मन/आत्मा (या तितली के प्रतीक से मानव-मन) को जागने के लिए कह रही हैं।

Final Answer:
वे भोग-विलास के सजीले बन्धनों, फूलों की मादक सुगंध और क्षणिक सुखों के आकर्षण से दूर रहने की बात कहती हैं, ताकि साधक अपने सच्चे लक्ष्य (दूर की यात्रा) से न भटके।
Was this answer helpful?
0
0

Top UP Board XII पद्यांश पर आधारित प्रश्न Questions

View More Questions