'फलात्' शब्द संस्कृत का रूप है, जिसका मूल शब्द 'फल' है। 'फल' का अर्थ होता है — परिणाम या फल (fruit/result)।
संस्कृत में जब किसी शब्द के अंत में '–आत्' (–āt) प्रत्यय जुड़ता है, तो यह सामान्यतः पंचमी विभक्ति, एकवचन को दर्शाता है।
पंचमी विभक्ति का प्रयोग सामान्यतः अपादान कारक के लिए किया जाता है, जो किसी से अलग होने या किसी के कारण होने को दर्शाता है। उदाहरण के लिए —
- वृक्षात् पतति (वृक्ष से गिरता है)
- गृहात् गच्छति (घर से जाता है)
इसी प्रकार, फलात् का अर्थ होता है — "फल से" या "फल के कारण"।
अतः यह स्पष्ट है कि 'फलात्' शब्द पंचमी विभक्ति, एकवचन रूप है, जो अपादान कारक का द्योतक है।