'हसति' शब्द संस्कृत की लट् लकार (वर्तमान काल) में धातु 'हस्' से बना है, जिसका अर्थ है — "हँसना"।
इसका रूप-विभाजन इस प्रकार है —
धातु: हस् + लट् लकार + तिप् प्रत्यय = हसति।
यहाँ 'तिप्' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, जो प्रथम पुरुष, एकवचन को दर्शाता है।
अर्थात्, इसका अर्थ होता है — "वह हँसता है" या "वह हँसती है।"
उदाहरण —
- बालकः हसति (लड़का हँसता है)
- बालिका हसति (लड़की हँसती है)
यहाँ क्रिया 'हसति' कर्ता (बालक या बालिका) के लिए प्रयुक्त हुई है, जो तृतीय पुरुष या प्रथम पुरुष (third person singular) के रूप में कार्य कर रही है।
अतः स्पष्ट है कि 'हसति' शब्द का पुरुष प्रथम और वचन एकवचन है।