'परमोद' शब्द का तत्सम रूप है :
Step 1: Restore tatsama spelling.
लोक-रूप 'परमोद' में 'र' की संधि/विकृति से 'प्रमोद' (आनन्द) बनता है—यह सही तत्सम है।
Step 2: Eliminate confusions.
'प्रमुद' अशुद्ध; 'प्रमाद' अर्थतः 'चूक/अविवेक'—भिन्न शब्द। अतः (3) सही।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'करुण रस' का स्थायीभाव है :
'पीपर पत सरिस मन डोला' में अलंकार है :
"मुनि केवट के बैन, प्रेम लपेते अटपटे।
बिसरे करूना ऐन, चितइ जानकी लखन तनु।"
उपर्युक्त पंक्तियों में छन्द है :
'अनुचर' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है :
प्रत्यय के प्रकार हैं :