चरण 1: प्रश्न को समझना:
प्रश्न एक विशिष्ट आनुवंशिक विकार के बारे में पूछ रहा है जो हीमोग्लोबिन की बीटा-ग्लोबिन श्रृंखला में एक विशिष्ट अमीनो अम्ल प्रतिस्थापन के कारण होता है।
चरण 2: विकार का विश्लेषण:
वर्णित आणविक दोष - बीटा-ग्लोबिन श्रृंखला के छठे स्थान पर ग्लूटामिक अम्ल (Glu) का वैलीन (Val) द्वारा प्रतिस्थापन - दात्र-कोशिका अरक्तता (Sickle-cell anaemia) का क्लासिक कारण है।
• यह एक बिंदु उत्परिवर्तन (point mutation) का परिणाम है, जहां बीटा-ग्लोबिन जीन में GAG कोडॉन GUG में बदल जाता है।
• इस परिवर्तन के कारण, कम ऑक्सीजन की स्थिति में, असामान्य हीमोग्लोबिन (HbS) अणु बहुलकीकृत हो जाते हैं, जिससे लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs) द्वि-अवतल आकार से बदलकर एक दरांती (sickle) जैसे लम्बे आकार की हो जाती हैं।
• ये कठोर और दरांती के आकार की कोशिकाएं छोटी रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध कर सकती हैं और जल्दी नष्ट हो जाती हैं, जिससे अरक्तता और अन्य लक्षण उत्पन्न होते हैं।
चरण 3: अन्य विकल्पों का मूल्यांकन:
• (A) हीमोफीलिया (Haemophilia): यह एक लिंग-सहलग्न अप्रभावी विकार है जिसमें रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया में शामिल प्रोटीन (क्लॉटिंग फैक्टर) की कमी हो जाती है।
• (B) थैलेसीमिया (Thalassemia): यह एक ऑटोसोमल अप्रभावी विकार है जिसमें ग्लोबिन श्रृंखलाओं (अल्फा या बीटा) के संश्लेषण की दर कम हो जाती है। यह एक मात्रात्मक समस्या है, गुणात्मक नहीं।
• (D) फीनाइलकीटोनूरिया (Phenylketonuria): यह एक ऑटोसोमल अप्रभावी चयापचय संबंधी विकार है जो फिनाइलएलानिन हाइड्रोक्सीलेज एंजाइम की कमी के कारण होता है।
चरण 4: अंतिम उत्तर:
बीटा-ग्लोबिन श्रृंखला में Glu का Val द्वारा प्रतिस्थापन दात्र-कोशिका अरक्तता का कारण बनता है। अतः, विकल्प (C) सही है।