Question:

क्या पत्रकारीय लेखन को जल्दी में लिखा गया साहित्य माना जा सकता है ? स्पष्ट कीजिए। 
 

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जब पत्रकारिता में भाव, सौंदर्य और संवेदना का संगम होता है — तब वह साहित्य बन जाती है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

पत्रकारीय लेखन और साहित्य में बुनियादी भिन्नता होते हुए भी कई बार पत्रकारिता साहित्य का स्वरूप ग्रहण कर लेती है, विशेषतः तब जब वह संवेदनशील, मानवतावादी, विश्लेषणात्मक और शैलीपूर्ण हो।
प्रसिद्ध पत्रकारों जैसे रघुवीर सहाय, क़ुलदीप नैयर, कमलेश्वर, प्रभाष जोशी आदि ने अपनी रचनात्मक लेखनी से इस अंतर को कम किया है।
हालाँकि पत्रकारिता समय-संवेदी होती है और साहित्य कालातीत होता है, फिर भी पत्रकार की भाषा, दृष्टिकोण और प्रस्तुति साहित्यिक हो सकती है।
यदि किसी रिपोर्ट या संपादकीय में गद्य सौंदर्य, भावनात्मक संप्रेषण और मानवीय संवेदना हो, तो वह साहित्य जैसा अनुभव दे सकता है।
इसलिए, पत्रकारीय लेखन को “जल्दी में लिखा गया साहित्य” कहा जा सकता है, बशर्ते उसमें साहित्यिक गुण हों।
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