दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
मुझे भूल मत मारो,
होकर मधु के मीत मदन, पग तुम कब, गलन न गारो,
मुझेविषमता, तुम्हें विषमाश्रु, कहाँ, भिन्न परिचय।
नहीं भीगने यह कोई, जो तुम जाल पसारो,
बल से तो सिंधु-बिंदु यह, यह रस रेन निहारो।
रज – वंद सरोज, तुम्हें तो मेरे पति पर बांधे,
लो, यह मेरी क्षण-पूर्ति, उस रीति के सिर पर धारे।
उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
प्रस्तुत पद्यांश में उर्मिला ने अपने सिंधु-बिंदु को किसके समान बताया है?
'होकर मधु के मीत मदन' पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार लिखिए।
'मैं अकला चला विवशोग्रही, कुछ तो दया विचारो' में कौन सा रस प्रमुख किया गया है?