Question:

पद्यांश: मैं नीर भरी दुख की बदली!
स्पंदन में चिर निस्पंद बसा,
क्रंदन में आहत विश्व हँसा,
नयनों में दीपक से जलते,
पलकों में निर्झरिणी मचली!
(iv) कवयित्री के निरन्तर रुदन का क्या कारण है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का आशय:
पद्यांश में कवयित्री अपने आँसुओं और पीड़ा की बात कर रही हैं। हमें यह बताना है कि उनके निरन्तर रोने का कारण क्या है।

चरण 2: कारण:
महादेवी वर्मा के काव्य में वेदना का मुख्य कारण अपने आराध्य, अर्थात् परमात्मा (प्रियतम) से बिछुड़ने की पीड़ा है। यह विरह-वेदना उनके हृदय में सदा बसी रहती है, इसलिए उनकी आँखों से आँसू बहते रहते हैं।
साथ ही वे संसार के दुखी लोगों की पीड़ा को भी अपनी पीड़ा मानती हैं। इसी कारण उनका रुदन कभी रुकता नहीं।

चरण 3: पद्यांश से प्रमाण:
‘स्पंदन में चिर निस्पंद बसा’ से पता चलता है कि उनके हृदय की हर धड़कन में गहरी पीड़ा छिपी है।

अंतिम उत्तर:
कवयित्री के निरन्तर रुदन का कारण प्रियतम से बिछुड़ने की विरह-वेदना है।
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