Question:

पद्यांश: मुझे फूल मत मारो
मैं अबला बाला वियोगिनी कुछ तो दया विचारो
होकर मधु के मीत मदन, पटु तुम कटु गरल न गारो
मुझे विकलता तुम्हें विफलता, ठहरो, श्रम परिहारो
नहीं भोगिनी यह मैं कोई, जो तुम जाल पसारो
बल हो तो सिंदूर-बिन्दु यह-यह हरनेत्र निहारो।
रूप-दर्प कंदर्प, तुम्हें तो मेरे पति पर बारो,
लो यह मेरी चरण धूलि, उस रति के सिर पर धारो।
(iv) “मैं अबला बाला वियोगिनी, कुछ तो दया विचारो” पंक्ति में कौन-सा रस प्रयुक्त है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: रस का नाम:
इस पंक्ति में वियोग श्रृंगार रस है। इसे विप्रलम्भ श्रृंगार भी कहते हैं।

चरण 2: परिभाषा:
जहाँ नायक और नायिका के प्रेम का वर्णन हो और उनके मिलन के अभाव, यानी वियोग का चित्रण हो, वहाँ वियोग श्रृंगार रस होता है।

चरण 3: पंक्ति में प्रमाण:
स्थायी भाव रति है। आश्रय उर्मिला है और आलम्बन उसके पति लक्ष्मण हैं। उद्दीपन वसन्त और कामदेव के बाण हैं। ‘मैं अबला बाला वियोगिनी’ शब्दों से पति से बिछुड़ने की पीड़ा प्रकट होती है।

अंतिम उत्तर:
वियोग श्रृंगार रस।
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