Question:

पद्यांश: बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले?
पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले?
विश्व का क्रंदन भुला देगी मधुप की मधुर गुनगुन,
क्या डुबो देंगे तुझे यह फूल के दल ओस-गीले?
तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना!
जाग तुझको दूर जाना!
(iv) 'बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: शब्दार्थ:
मोम के बंधन: मोम जैसे कोमल, पर पिघलाने वाले मोह के बंधन। सजीले: सजे हुए, आकर्षक।

चरण 2: भाव:
कवयित्री प्रश्न पूछती हैं कि क्या ये आकर्षक और कोमल सांसारिक बंधन तुझे बाँध लेंगे? इसका उत्तर स्वयं ही नहीं है। मोम कोमल होता है, इसलिए उसके बंधन कठोर नहीं दिखते, पर वे भी साधक को उलझा सकते हैं। कवयित्री का विश्वास है कि दृढ़ संकल्प वाला मन इनमें नहीं फँसेगा।

चरण 3: विशेष:
‘मोम के बंधन’ में रूपक है और प्रश्न शैली का प्रयोग हुआ है।

निष्कर्ष:
इस पंक्ति का भाव है कि सांसारिक सुखों के मोहक बंधन लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले को रोक नहीं सकते।
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