'इत्यादि' में सन्धि है :
Step 1: Observe substitution.
'इति + आदि' के मेल पर 'इत्यादि'—यहाँ इ + आ के संयोग में य् का आगम दिखता है, जिसे यण सन्धि कहते हैं।
Step 2: Differentiate.
गुण/वृद्धि स्वर-वृद्धि कराते हैं; जश्त्व व्यञ्जन-परिवर्तन—यहाँ उपयुक्त नहीं। इसलिए (1) सही।
जिनके अलग-अलग रूप वाक्यों में मिलते हैं, वे पद कहलाते हैं
कर्तृवाच्य' में प्रधानता होती है
अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद हैं
पृथ्वी' का पर्यायवाची शब्द नहीं है
नवरत्न' में समास है