Question:

पद्यांश: यही आता है इस मन में,
छोड़ धाम धन जाकर मैं भी रहूँ उसी वन में।
प्रिय के व्रत में विघ्न न डालूँ, रहूँ निकट भी दूर।
व्यथा रहे, पर साथ-साथ ही समाधान भरपूर।
हर्ष डूबा हो रोदन में,
यही आता है इस मन में।
(iii) उपर्युक्त पद्यांश में कौनसा रस प्रयुक्त हुआ है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: रस की पहचान:
इस पद्यांश में वियोग शृंगार रस (विप्रलम्भ शृंगार) है।

चरण 2: लक्षण:
जहाँ प्रेमी और प्रेमिका के बिछड़ने की पीड़ा का वर्णन हो, वहाँ वियोग शृंगार होता है। इसका स्थायी भाव रति है।

चरण 3: पद्यांश में प्रमाण:
आलम्बन लक्ष्मण हैं और आश्रय उर्मिला। वन में रहते पति की याद, ‘व्यथा रहे’ और ‘रोदन’ जैसे शब्द उद्दीपन और अनुभाव हैं। पति से मिलने की चाह और दूरी का दुख साफ दिखता है।

अंतिम उत्तर:
इस पद्यांश में वियोग शृंगार रस है।
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