Question:

पद्यांश: दुःख की पिछली रजनी बीच
विकसता सुख का नवल प्रभात
एक परदा यह झीना नील
छिपाये हैं जिसमें सुख गात।
(iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: शब्दार्थ:
रजनी = रात। पिछली रजनी = रात का अन्तिम भाग। विकसता = खिलता हुआ। नवल = नया। प्रभात = सवेरा।

चरण 2: भावार्थ:
श्रद्धा मनु से कहती है कि दुःख की काली रात जब समाप्त होने को होती है, तभी सुख का नया सवेरा खिलने लगता है। जैसे हर रात के बाद सुबह होती है, वैसे ही हर दुःख के बाद सुख आता है। इसलिए दुःख से घबराना नहीं चाहिए।

चरण 3: विशेष:
दुःख को रात और सुख को प्रभात कहा गया है, इसलिए यहाँ रूपक अलंकार है। भाषा तत्सम शब्दों वाली, सरल और भावपूर्ण है।

निष्कर्ष:
कवि का आशय है कि दुःख जीवन का अन्त नहीं, सुख के आगमन की सूचना है।
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