Question:

पद्यांश: मुझे फूल मत मारो
मैं अबला बाला वियोगिनी कुछ तो दया विचारो
होकर मधु के मीत मदन, पटु तुम कटु गरल न गारो
मुझे विकलता तुम्हें विफलता, ठहरो, श्रम परिहारो
नहीं भोगिनी यह मैं कोई, जो तुम जाल पसारो
बल हो तो सिंदूर-बिन्दु यह-यह हरनेत्र निहारो।
रूप-दर्प कंदर्प, तुम्हें तो मेरे पति पर बारो,
लो यह मेरी चरण धूलि, उस रति के सिर पर धारो।
(iii) पद्यांश में उर्मिला ने अपने सिंदूर बिन्दु को किसके समान बताया है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सम्बन्धित पंक्ति:
उर्मिला कहती है: बल हो तो सिंदूर-बिन्दु यह-यह हरनेत्र निहारो।

चरण 2: तुलना:
उर्मिला ने अपने माथे के सिंदूर-बिन्दु को शिव के नेत्र (हरनेत्र) के समान बताया है।

चरण 3: कारण:
शिव के तीसरे नेत्र की अग्नि ने ही कामदेव को भस्म किया था। उर्मिला कहती है कि मेरा सिंदूर-बिन्दु भी वैसा ही तेजस्वी है, इसलिए हे कामदेव, इसे देखकर सावधान हो जाओ।

अंतिम उत्तर:
सिंदूर-बिन्दु की तुलना शिवजी के नेत्र (हरनेत्र) से की गई है।
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