Question:

पद्यांश: बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले?
पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले?
विश्व का क्रंदन भुला देगी मधुप की मधुर गुन-गुन,
क्या डुबा देंगे तुझे यह फूल के दल ओस-गीले?
तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना।
जाग तुझको दूर जाना।
(iii) उपर्युक्त पद्यांश से पथिक को क्या प्रेरणा मिलती है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: पद्यांश का स्रोत:
ये पंक्तियाँ महादेवी वर्मा के गीत ‘जाग तुझको दूर जाना’ से ली गई हैं। यह गीत उनके काव्य-संग्रह ‘सांध्यगीत’ में है।

चरण 2: पथिक को मिलने वाली प्रेरणा:
कवयित्री पथिक से कहती हैं कि संसार के सुंदर आकर्षण उसे बाँध नहीं सकते। मोम जैसे कोमल बंधन, तितलियों के रंगीन पंख, भौंरे की गुन-गुन और ओस से भीगे फूल उसकी राह नहीं रोक सकते।
इसलिए पथिक को प्रेरणा मिलती है कि वह सुख-सुविधाओं के मोह में न फँसे। वह अपनी ही छाया को अपना कारागार न बनाए। आलस्य त्यागकर जागे, क्योंकि उसे अपने लक्ष्य तक बहुत दूर जाना है।

निष्कर्ष:
पद्यांश पथिक को मोह-बंधन तोड़कर सजग रहने और निरंतर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है।
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