Question:

पद्यांश: कहा आगंतुक ने सस्नेह-
'अरे तुम इतने हुए अधीर!
हार बैठे जीवन का दाँव
जीतते मरकर जिसको वीर।
तप नहीं केवल जीवन सत्य
करुण यह क्षणिक दीन अवसाद;
तरल आकांक्षा से है भरा
सो रहा आशा का आह्लाद।
(iii) श्रद्धा मनु को प्रेरित करते हुए क्या कहती है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझें:
प्रश्न यह पूछता है कि पद्यांश में श्रद्धा मनु को किस बात के लिए प्रेरित कर रही है। उत्तर पद्यांश से ही देना है।

चरण 2: उत्तर:
श्रद्धा मनु से कहती है कि तुम इतने अधीर क्यों हो गए हो। जीवन की बाजी हारकर बैठ जाना वीरों का काम नहीं है। वह समझाती है कि केवल कष्ट और तप ही जीवन का सत्य नहीं है। उदासी क्षणभर की है और मन में आशा तथा उत्साह छिपा है, उसे जगाओ। इस तरह वह मनु को निराशा छोड़कर उत्साह से कर्म में लगने की प्रेरणा देती है।

अंतिम उत्तर:
श्रद्धा मनु को धैर्य रखने, हताशा त्यागने और आशा के साथ कर्म करने के लिए प्रेरित करती है।
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