Question:

पद्यांश: मुझे फूल मत मारो
मैं अबला बाला वियोगिनी कुछ तो दया विचारो
होकर मधु के मीत मदन, पटु तुम कटु गरल न गारो
मुझे विकलता तुम्हें विफलता, ठहरो, श्रम परिहारो
नहीं भोगिनी यह मैं कोई, जो तुम जाल पसारो
बल हो तो सिंदूर-बिन्दु यह-यह हरनेत्र निहारो।
रूप-दर्प कंदर्प, तुम्हें तो मेरे पति पर बारो,
लो यह मेरी चरण धूलि, उस रति के सिर पर धारो।
(ii) 'होकर मधु के मीत मदन' पंक्ति में कौन-सा अलंकार प्रयुक्त है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: अलंकार की पहचान:
‘होकर मधु के मीत मदन’ में अनुप्रास अलंकार है।

चरण 2: लक्षण:
जहाँ किसी वर्ण या वर्णों की आवृत्ति एक से अधिक बार होने पर वाक्य में सुन्दरता आती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

चरण 3: पंक्ति में प्रमाण:
इस पंक्ति में ‘म’ वर्ण की बार-बार आवृत्ति है: मधु, मीत, मदन। इसी आवृत्ति से पंक्ति में नाद-सौन्दर्य आ गया है।

अंतिम उत्तर:
अलंकार: अनुप्रास (‘म’ वर्ण की आवृत्ति)।
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