‘आचारण की सभ्यता’ निबंध के लेखक हैं:
‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ यह कथन किस लेखक का है?
‘उसने कहा था’ कहानी के लेखक हैं:
‘पिंजरे की मैना’ निबंध संग्रह के लेखक हैं:
‘कलम का सिपाही’ के रचनाकार हैं:
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
मुझे भूल मत मारो,
होकर मधु के मीत मदन, पग तुम कब, गलन न गारो,
मुझेविषमता, तुम्हें विषमाश्रु, कहाँ, भिन्न परिचय।
नहीं भीगने यह कोई, जो तुम जाल पसारो,
बल से तो सिंधु-बिंदु यह, यह रस रेन निहारो।
रज – वंद सरोज, तुम्हें तो मेरे पति पर बांधे,
लो, यह मेरी क्षण-पूर्ति, उस रीति के सिर पर धारे।
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
बीती विभावरी जाग री!
अंबर-पनघट में डूबा रही!
तारा-घर उषा-नागरी
खग-कुल कुल-कुल सा बोल रहा,
किसलय का अंबर डोल रहा,
लो यह ललिता भी भर लाई।
मधु मुकुल नवल रस गागर।
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
मुझे भूल मत मारो,
मैं अकला बाला वियोगिनी, कुछ तो दया विचारो।
होकर मधु के मीत मदन, पटु तुम कटु गरल न गारो,
मुझे विकलता तुम्हें विषमता ठहरो श्रम परिचारी।
नहीं भीगने यह कोई, जो तुम जाल पसारो,
बल हो तो सिंधु-बिंदु यह - यह हर नैन निहारो।
रूप-दर्प कंचुक तुम्हें तो मेरे पति पर बांधे,
लो, यह मेरी चरण-धूलि उस रीति के सिर पर धारे॥
दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
सावधान मनुज! यदि विज्ञान है तलवार,
तो इसे फेंक तजकर मोह, स्मृति के पार।
हो चुका है सिद्ध रे, शिशु अभी अजान,
फूल काँटों की तुझे कुछ भी नहीं पहचान।
खेल सकता तू नहीं ले हाथ में तलवार,
काट लेगा अंग, तीखी है बड़ी यह धार॥
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विस्तृत नभ का कोई कोना,
मेरा न कभी अपना होना,
परिचय इतना इतिहास यही
उमड़ी कल थी मिट आज चली !