Question:

पद्यांश: मैं नीर भरी दुख की बदली!
स्पंदन में चिर निस्पंद बसा,
क्रंदन में आहत विश्व हँसा,
नयनों में दीपक से जलते,
पलकों में निर्झरिणी मचली!
(i) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सन्दर्भ:
प्रस्तुत पद्यांश छायावाद की प्रमुख कवयित्री महादेवी वर्मा द्वारा रचित गीत ‘मैं नीर भरी दुख की बदली’ से लिया गया है। यह गीत उनके काव्य-संग्रह ‘नीरजा’ में संकलित है और हमारी पाठ्यपुस्तक के काव्य-खण्ड में दिया गया है।

चरण 2: प्रसंग:
इन पंक्तियों में कवयित्री ने अपने जीवन को बरसने को तैयार बदली के समान बताया है। वे कहती हैं कि उनके मन में पीड़ा भरी हुई है, फिर भी उसी पीड़ा से संसार के लिए करुणा और प्रेम प्रकट होता है।

अंतिम उत्तर:
सन्दर्भ: पाठ ‘मैं नीर भरी दुख की बदली’, कवयित्री महादेवी वर्मा, संग्रह ‘नीरजा’।
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