Question:

पद्यांश: यही आता है इस मन में,
छोड़ धाम धन जाकर मैं भी रहूँ उसी वन में।
प्रिय के व्रत में विघ्न न डालूँ, रहूँ निकट भी दूर।
व्यथा रहे, पर साथ-साथ ही समाधान भरपूर।
हर्ष डूबा हो रोदन में,
यही आता है इस मन में।
(i) उपर्युक्त पद्यांश का शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: शीर्षक:
इस पद्यांश का उचित शीर्षक है ‘यही आता है इस मन में’ (उर्मिला का विरह-गीत)। यह पंक्ति पूरे गीत की टेक है।

चरण 2: कवि का नाम:
इसके कवि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त हैं।

चरण 3: स्रोत:
यह गीत उनके महाकाव्य ‘साकेत’ के नवम सर्ग से लिया गया है। इसमें लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला अपने मन की बात कहती है।

अंतिम उत्तर:
शीर्षक: यही आता है इस मन में; कवि: मैथिलीशरण गुप्त।
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