Question:

पद्यांश: कहा आगंतुक ने सस्नेह-
'अरे तुम इतने हुए अधीर!
हार बैठे जीवन का दाँव
जीतते मरकर जिसको वीर।
तप नहीं केवल जीवन सत्य
करुण यह क्षणिक दीन अवसाद;
तरल आकांक्षा से है भरा
सो रहा आशा का आह्लाद।
(i) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सन्दर्भ:
प्रस्तुत पद्यांश छायावाद के प्रमुख कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘श्रद्धा-मनु’ पाठ से लिया गया है। यह अंश कामायनी के ‘श्रद्धा सर्ग’ का है।

चरण 2: संक्षिप्त परिचय:
इस पाठ में हिमालय पर अकेले बैठे निराश मनु से श्रद्धा की भेंट होती है। श्रद्धा स्नेह के साथ उन्हें समझाती है और जीवन में आशा जगाती है।

निष्कर्ष:
सन्दर्भ: कामायनी (श्रद्धा सर्ग) के ‘श्रद्धा-मनु’ पाठ से, कवि जयशंकर प्रसाद।
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