Question:

पद्यांश: दुःख की पिछली रजनी बीच
विकसता सुख का नवल प्रभात;
एक परदा यह झीना नील
छिपाये है जिसमें सुख गात।
जिसे तुम समझे हो अभिशाप,
जगत की ज्वालाओं का मूल;
ईश का वह रहस्य वरदान
कभी मत इसको जाना भूल।
(i) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: सन्दर्भ:
प्रस्तुत पद्यांश पाठ्यक्रम के ‘श्रद्धा-मनु’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता छायावाद के प्रमुख कवि जयशंकर प्रसाद हैं। यह अंश उनके महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘श्रद्धा’ सर्ग से चुना गया है।

चरण 2: प्रसंग:
जल-प्रलय के बाद मनु अकेले और निराश हैं। उन्हें दुःख ही जीवन का सत्य लगता है। तब श्रद्धा उन्हें समझाती है कि दुःख के बाद सुख अवश्य आता है। इन पंक्तियों में वही आश्वासन दिया गया है।

निष्कर्ष:
पाठ ‘श्रद्धा-मनु’, कवि जयशंकर प्रसाद और महाकाव्य ‘कामायनी’ का श्रद्धा सर्ग, यही इस पद्यांश का सन्दर्भ है।
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