हास्य रस:
हास्य रस का स्थायी भाव 'हास' होता है। यह रस किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थिति की अजीबो-गरीब प्रवृत्तियों को देखकर उत्पन्न होता है। हास्य रस में विनोद, व्यंग्य और उपहास के तत्व सम्मिलित होते हैं।
उदाहरण:
"सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली।"
(इस उदाहरण में व्यंग्यपूर्ण हास्य व्यक्त किया गया है।)
शान्त रस:
शान्त रस का स्थायी भाव 'शम' (शांति) होता है। यह रस वैराग्य, आध्यात्मिकता और सच्चे आत्मज्ञान के अनुभव से उत्पन्न होता है।
उदाहरण:
"संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है, अतः मोह छोड़कर शांति की ओर बढ़ो।"