'हस्तु' धातु रूप का वचन एवं पुरुष है
Step 1: धातु रूप का अर्थ.
'हस्तु' = 'हो' धातु का प्रयोग है, जिसका अर्थ है — "होने दे" या "हो"। यह आज्ञार्थक लकार में प्रयोग होता है।
Step 2: पुरुष की पहचान.
'हस्तु' का प्रयोग प्रथम पुरुष (वह) के लिए होता है। उदाहरण — सः हस्तु (वह हो)।
Step 3: वचन की पहचान.
यहाँ एकवचन का रूप है, क्योंकि केवल एक के लिए प्रयोग है।
Step 4: निष्कर्ष.
अतः 'हस्तु' = एकवचन, प्रथम पुरुष।
अपने निवास स्थान के आसपास / मोहल्ले की नालियों की समुचित सफाई के लिए नगर/जनपद के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखिए।
अपनी पाठ्य-पुस्तक में से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए, जो इस प्रश्न पत्र में न आया हो।
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मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के आधार पर 'महात्मा गाँधी' के चरित्र की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
'तेषाम्' में विभक्ति और वचन है :
'पठथः' धातु रूप का वचन एवं पुरुष है:
'मधु' शब्द का पंचमी विभक्ति एवं एकवचन रूप है:
'फल' शब्द का तृतीया विभक्ति, बहुवचन रूप है
'पठिष्यथ' धातु का पुरुष एवं वचन है: