Question:

दिए गए निर्गुण-सम्बन्धी पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए : 
निरगुण कौन देश को बासी ?
मधुकर कहि समुझाइ साँहि दे, बुढ़ाती साँच न हाँसी।।
को है जनक, कौन है जननी, कौन नारि, को दासी ?
कोहे बरण, भेषहिं के कैसी, किहिं रस मैं अडिगलासी ?
पावोगी पुनि किया आपनो, जो रे करोगे गाँसी। 
सुनत मौन है रहयो बावरी, सूर सबै मति नासी।। 
(i) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए। 
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। 
(iii) निर्गुण ब्रह्म के वर्णन में क्या कठिनाई व्यक्त की है?

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पद्य-व्याख्या में संदर्भ–भावार्थ–कला–संदेश का क्रम रखें।
Updated On: Oct 11, 2025
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Solution and Explanation

(i) सन्दर्भ:
पंक्तियाँ निर्गुण भक्ति-परम्परा से हैं जहाँ ईश्वर को नाम-रूप से परे माना गया है।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:
कवि पूछता है—निर्गुण का न पिता, न माता, न पत्नी, न सेविका—अर्थात वह सांसारिक संबंधों से परे है; उसे मानवीय रिश्तों/वर्गीकरणों में नहीं बाँधा जा सकता।
(iii) वर्णन की कठिनाई:
निर्गुण अवर्णनीय है—वाणी/बुद्धि उसकी पूर्ण अनुभूति नहीं करा सकती; इसलिए कवि मौन को भी उपयुक्त मानता है।
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