रेखांकित अंश — "आहुति-सी गिर पड़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी" — में कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई के वीरगति प्राप्त करने के दृश्य को अत्यंत भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया है।
जब रानी लक्ष्मीबाई ने युद्ध में अपने प्राण त्यागे, तो उनकी देह चिता पर आहुति की तरह समर्पित हो गई। वह ज्वाला के समान प्रज्ज्वलित हो उठीं — जैसे उनका बलिदान पूरे देश के लिए प्रेरणा की ज्योति बन गया हो।
कवयित्री ने रानी के बलिदान को आहुति और ज्वाला के प्रतीक से जोड़ा है, जो त्याग, शौर्य और अमरत्व का प्रतीक हैं। यह अंश रानी के अदम्य साहस और देशप्रेम की अमर गाथा को अमर कर देता है।