Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए :

‘‘उषा’ कविता भोर की आसमानी गति को धरती की जीवन भरी हलचल से जोड़ने वाली कविता है।’ पुष्टि कीजिए।

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कविता के बिंबों, जैसे गीला चौका, सिल और स्लेट, को गाँव के सुबह के कामों से जोड़कर देखें।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘उषा’ कविता शमशेर बहादुर सिंह की रचना है, जो हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आरोह’ में संकलित है।
इसमें कवि ने सूर्योदय से ठीक पहले के आकाश के बदलते रंगों का चित्रण किया है।
कवि ने इन रंगों को गाँव के घर-आँगन की रोज़ की चीज़ों से जोड़ा है।

चरण 2: आसमानी गति और घरेलू बिंब:
भोर का आकाश ‘बहुत नीला शंख जैसे’ लगता है।
फिर वह ‘राख से लीपा हुआ चौका’ जैसा लगता है, जो अभी गीला पड़ा है। यह गाँव की गृहिणी के सुबह के काम की याद दिलाता है।
‘काली सिल जो ज़रा से लाल केसर से धुल गई हो’ और ‘स्लेट पर लाल खड़िया चाक मल दी हो’ जैसे बिंब रसोई और बच्चों की पढ़ाई से जुड़े हैं।

चरण 3: धरती की हलचल से जुड़ाव:
लिपा चौका, सिल पर मसाला पीसना, स्लेट पर लिखना, ये सब गाँव के जागते जीवन की हलचल हैं।
‘नील जल में किसी की गौर झिलमिल देह’ का बिंब भी सुबह के स्नान का चित्र है।
इस तरह आकाश का हर रंग धरती के किसी जीवंत काम से जुड़ जाता है।

अंतिम उत्तर:
कवि ने भोर के आकाश के बदलते रंगों को गीले चौके, सिल, स्लेट और स्नान जैसे ग्रामीण दैनिक जीवन के बिंबों से जोड़ा है, इसलिए यह कथन पूरी तरह सही है कि ‘उषा’ आसमानी गति को धरती की जीवन भरी हलचल से जोड़ती है।
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