Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

‘बादल राग’ कविता में बादलों के लिए प्रयुक्त ‘अशनि-पात से शापित’ तथा ‘गगन-स्पर्शी स्पर्द्धा धीर’ विशेषणों का सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

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‘अशनि-पात’ यानी वज्रपात, ‘गगन-स्पर्शी स्पर्द्धा धीर’ यानी आकाश छूने की होड़ करने वाले। बादल के वज्र से घायल ऊँचे पर्वतों (शोषक वर्ग) का प्रतीक, भाषा का ओज और बिंब लिखिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: संदर्भ:
‘बादल राग’ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविता है (आरोह भाग-2)। इसमें बादल को विप्लव अर्थात क्रांति का प्रतीक माना गया है। पंक्तियाँ हैं: ‘अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर, क्षत-विक्षत हत अचल-शरीर, गगन-स्पर्शी स्पर्द्धा धीर।’ ये विशेषण बादल के गर्जन और वज्रपात के प्रसंग में आए हैं और बादल के वज्र से घायल ऊँचे पर्वतों (अचल-शरीर) का चित्र बनाते हैं, जो शोषक पूँजीपति वर्ग के प्रतीक हैं।

चरण 2: ‘अशनि-पात से शापित’ का सौंदर्य:
‘अशनि-पात’ का अर्थ है वज्रपात। ‘शापित’ शब्द बताता है कि ऊँचे-ऊँचे वीर पर्वत मानो शाप के रूप में वज्र की मार झेल रहे हैं। इससे बादल की प्रचंड, विनाशकारी शक्ति और अहंकारी वर्ग के पतन का सजीव चित्र बनता है।

चरण 3: ‘गगन-स्पर्शी स्पर्द्धा धीर’ का सौंदर्य:
इसका अर्थ है आकाश को छूने की होड़ में धैर्य से खड़े रहने वाले। यह विशेषण पर्वतों की ऊँचाई और उनके घमंड को दिखाता है। इतनी ऊँचाई और दृढ़ता के बाद भी वे वज्रपात से क्षत-विक्षत हो जाते हैं, जबकि छोटे पौधे हँसते हैं। यही विरोध कविता को प्रभावशाली बनाता है।

चरण 4: शिल्प-सौंदर्य:
दोनों विशेषण तत्सम, सामासिक और ओजपूर्ण हैं। ‘स’, ‘श’ और ‘प’ ध्वनियों की आवृत्ति से अनुप्रास का नाद-सौंदर्य है। ये प्रतीकात्मक हैं और दृश्य बिंब रचते हैं।

अंतिम उत्तर:
ये विशेषण बादल के वज्र की विनाशक शक्ति और आकाश छूने की होड़ करने वाले ऊँचे पर्वतों अर्थात अहंकारी शोषक वर्ग के पतन का ओजपूर्ण, प्रतीकात्मक और चित्रात्मक वर्णन करते हैं।
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