Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

‘बादल राग’ कविता में ‘तिरती है समीर-सागर पर अस्थिर सुख पर दुख की छाया’ – पंक्ति से क्या आशय है ? कविता में किसके सुख-दुख की बात की जा रही है और क्यों ?

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बादल क्रांति का प्रतीक है। पंक्ति में पूँजीपति वर्ग के अस्थिर सुख और शोषितों के दुख के साथ क्रांति की छाया का भाव है।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह पंक्ति सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविता ‘बादल राग’ से ली गई है। इसमें कवि बादल को क्रांति और परिवर्तन के प्रतीक रूप में प्रस्तुत करता है।

चरण 2: पंक्ति का आशय:
‘समीर-सागर’ का अर्थ है वायु रूपी सागर। इस सागर पर बादल रूपी विप्लवकारी शक्ति तैरती है। ‘अस्थिर सुख’ का अर्थ है ऐसा सुख जो टिकाऊ नहीं है। कवि कहता है कि संसार का जो सुख है, वह स्थायी नहीं है और उस पर दुख की छाया मँडराती रहती है, यानी क्रांति का भय बना रहता है।

चरण 3: किसके सुख-दुख की बात:
कविता में शोषक पूँजीपति वर्ग के अस्थिर सुख और शोषित, पीड़ित किसान-मज़दूर वर्ग के दुख की बात है। पूँजीपति के ऐश्वर्य पर क्रांति की छाया है, जबकि शोषित वर्ग पहले से दुख में जल रहा है और बादल रूपी क्रांति से उसे नए जीवन की आशा है।

चरण 4: क्यों:
कवि ऐसा इसलिए कहता है कि शोषण पर टिका सुख कभी स्थायी नहीं रहता और अन्याय का अंत क्रांति से होता है।

अंतिम उत्तर:
पंक्ति का आशय है कि शोषकों का सुख अस्थिर है और उस पर क्रांति रूपी दुख की छाया है। कविता में शोषक और शोषित वर्ग के सुख-दुख की बात की गई है।
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