Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए: (i) अपने समाज या आसपास के किसी रीति-रिवाज़ या अंधविश्वास का उल्लेख करते हुए आज के वैज्ञानिक युग में उसकी प्रासंगिकता पर 'ढेले चुन लो' पाठ के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त कीजिए। (ii) संवदिया की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए लिखिए कि संवदिया की भूमिका मिलने पर आप उसका दायित्व और भूमिका कैसे निभाएँगे। (iii) 'दूसरा देवदास' पाठ के आधार पर लिखिए कि केबिल कार में बैठे संभव के मन में क्या कल्पनाएँ आ रही थीं।

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किन्हीं दो को चुनें। ढेलों की लॉटरी, संवदिया का 'उसी सुर और स्वर में' संवाद सुनाना और गुलाबी केबिल कार में संभव की कल्पनाएँ याद रखें।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का स्वरूप:
तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-40 शब्दों में लिखने हैं। यहाँ तीनों के आदर्श उत्तर दिए गए हैं।

चरण 2: उत्तर (i) 'ढेले चुन लो' और अंधविश्वास:
गुलेरी जी बताते हैं कि वैदिक काल में वर कन्या के सामने वेदी, गौशाला, खेत, चौराहे और मसान की मिट्टी के ढेले रखता था और कन्या जो ढेला उठाती, उसी से उसका भविष्य तय मान लिया जाता था।
हमारे समाज में भी विवाह के लिए केवल कुंडली मिलाना या बिल्ली के रास्ता काटने पर रुक जाना ऐसा ही अंधविश्वास है।
लेखक व्यंग्य करता है कि ढेलों पर भरोसा मूर्खता है, तो लाखों कोस दूर के ग्रहों पर भरोसा भी उतना ही निराधार है। वैज्ञानिक युग में ऐसे निर्णय तर्क, शिक्षा और गुणों के आधार पर होने चाहिए।

चरण 3: उत्तर (ii) संवदिया की विशेषताएँ और मेरी भूमिका:
रेणु की कहानी 'संवदिया' के अनुसार संवाद पहुँचाना सबके बस का काम नहीं है। संवदिया संवाद का प्रत्येक शब्द याद रखता है और जिस सुर और स्वर में संवाद सुनाया गया, ठीक उसी ढंग से जाकर सुनाता है। हरगोबिन बिना मज़दूरी लिए यह काम करता था और बड़ी बहुरिया के दुख से उसका मन भर आया।
यदि मुझे यह भूमिका मिले, तो मैं संदेश पूरी सच्चाई से पहुँचाऊँगा, दोनों पक्षों की बात गोपनीय रखूँगा और हरगोबिन की तरह भेजने वाले के मान-सम्मान और भलाई का ध्यान रखूँगा।

चरण 4: उत्तर (iii) केबिल कार में संभव की कल्पनाएँ:
ममता कालिया की कहानी में संभव मंसा देवी जाने के लिए गुलाबी केबिल कार में बैठता है, क्योंकि हर की पौड़ी पर मिली अनजान लड़की के कारण उसे कल से गुलाबी के सिवा कोई रंग अच्छा नहीं लग रहा था।
चढ़ने से पहले बिंदी बेचते बच्चों को देखकर वह मन ही मन उस अज्ञात युवती के माथे पर बिंदी सजा चुका था। ऊपर जाते हुए नीचे के रंग-बिरंगे फूलों पर उसे लगता है कि कोई हिंडोला उड़ा जा रहा है। उसका मन उसी लड़की से फिर मिलने के सपनों में खोया रहता है।

अंतिम उत्तर:
परीक्षा में इनमें से कोई दो उत्तर लगभग 40-40 शब्दों में, पाठ के नाम के साथ लिखें।
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