Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :

‘लेखन दो खंभों के बीच बँधी रस्सी की तरह नहीं होता, उसमें खुले मैदान में दौड़ने, कूदने और कुलाँचे भरने की छूट होती है।’ सिद्ध कीजिए।

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तय प्रारूप वाले लेखन और स्वतंत्र रचनात्मक लेखन का अंतर सोचें।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: कथन का भाव:
यह कथन अप्रत्याशित विषयों पर रचनात्मक लेखन के बारे में है।
‘दो खंभों के बीच बँधी रस्सी’ का अर्थ है बँधा-बँधाया, तय ढाँचे वाला लेखन।

चरण 2: सिद्ध करना:
रचनात्मक लेखन में कोई निश्चित ढाँचा नहीं होता। लेखक विषय को अपनी दृष्टि से देखता है और विचारों को स्वतंत्र रूप से रखता है।
वह ‘मैं’ शैली अपना सकता है, अपने अनुभव, कल्पना और उदाहरण जोड़ सकता है। यही खुले मैदान में दौड़ने की छूट है।
बस विचारों में तारतम्य और विषय से जुड़ाव बना रहना चाहिए।

अंतिम उत्तर:
रचनात्मक लेखन तय नियमों में बँधा नहीं होता; उसमें विचार, शैली और कल्पना की पूरी स्वतंत्रता होती है, इसलिए वह खुले मैदान में कुलाँचे भरने जैसा है।
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