Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :

‘भाषा के चक्कर में बात का टेढ़ी फँसने’ – से क्या आशय है ? ‘बात सीधी थी पर’ कविता के संदर्भ में लिखिए।

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कवि ने सीधी बात को सजाने के लिए भाषा को जटिल किया, जिससे बात उलझ गई। सहज भाषा ही कथ्य के अनुकूल होती है।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: संदर्भ:
‘बात सीधी थी पर’ कुँवर नारायण की कविता है। इसमें कवि ने बताया है कि भाव के अनुसार सही भाषा का चुनाव कितना ज़रूरी है।

चरण 2: पंक्ति का आशय:
कवि के मन में एक सीधी-सादी बात थी। उसने उसे प्रभावशाली बनाने के लिए कठिन और घुमावदार भाषा में कहना चाहा।
ऐसा करने से बात उलझती चली गई और उसका असली अर्थ दब गया। इसी को ‘बात का टेढ़ी फँसना’ कहा गया है।

चरण 3: आदर्श उत्तर (लगभग 40 शब्द):
कवि सीधी बात को आकर्षक बनाने के लिए भाषा को जटिल और बनावटी करता गया। इससे बात का अर्थ और स्पष्टता घटती गई और वह पेचीदा बन गई। अर्थात भाषा के दिखावे में कथ्य खो गया।

अंतिम उत्तर:
बनावटी और उलझी भाषा के कारण सीधी बात का अर्थ बिगड़ गया, यही ‘भाषा के चक्कर में बात का टेढ़ी फँसना’ है।
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