Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 100 शब्दों में उत्तर दीजिए :

अपनी ही शादी की पार्टी में से यशोधर बाबू पूजा के बहाने क्यों उठकर चले गए ? उनका मेहमानों के बीच से इस तरह उठकर चले जाना, आपकी दृष्टि में कहाँ तक उचित है ? ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के संदर्भ में तर्क-सम्मत उत्तर दीजिए।

Show Hint

केक काटने, केक और लड्डू न खाने और पूजा को लंबा खींचने की घटना याद कीजिए, फिर अतिथि-सत्कार की दृष्टि से मूल्यांकन कीजिए।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘सिल्वर वैडिंग’ मनोहर श्याम जोशी की कहानी है, जो ‘वितान’ भाग 2 में संकलित है।
यशोधर बाबू की शादी की पच्चीसवीं वर्षगाँठ पर उनके बच्चों ने घर में पार्टी रखी। यशोधर बाबू दफ़्तर से देर से, साढ़े आठ बजे घर पहुँचे, तब तक पार्टी चल रही थी।
पूरी पार्टी उन्हें ‘समहाउ इंप्रॉपर’ लगी, यानी कुछ अनुचित-सी लगी।

चरण 2: पूजा के बहाने उठने का कारण:
बच्चों ने आग्रह करके उनसे केक कटवाया। यह विलायती परंपरा उन्हें बचकानी लगी।
उन्होंने केक खाने से इनकार किया, क्योंकि उसमें अंडा होता है। लड्डू खाने से भी यह कहकर मना कर दिया कि अभी संध्या नहीं की है।
इस पर भूषण ने झुँझलाकर कहा कि पहले जाकर संध्या कीजिए। यशोधर बाबू पूजा में चले गए और पंद्रह मिनट की पूजा को लगभग पच्चीस मिनट तक खींचा, ताकि ज़्यादातर मेहमान उठकर चले जाएँ।

चरण 3: उचित या अनुचित, तर्क:
अपने संस्कारों पर टिके रहना उनकी निजी आस्था है, इसलिए उनकी असहजता समझी जा सकती है।
पर मेहमान उन्हीं के सम्मान में आए थे। उन्हें छोड़कर जान-बूझकर पूजा लंबी करना शिष्टाचार के विरुद्ध था और इससे बच्चों की भावना को भी ठेस पहुँची।
वे थोड़ा समय मेहमानों के साथ बिताकर, अपनी बात शालीनता से कहकर पूजा के लिए जा सकते थे।

अंतिम उत्तर:
आधुनिक ढंग की पार्टी, केक काटने जैसी रस्म और बच्चों के व्यवहार से असहज होकर यशोधर बाबू संध्या-पूजा के बहाने उठ गए और पूजा को जान-बूझकर लंबा खींचा। उनकी भावना समझ में आती है, पर मेहमानों को इस तरह छोड़ देना उचित नहीं था।
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