Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

‘यशोधर बाबू का व्यक्तित्व किशनदा की प्रतिच्छाया है’ इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

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यशोधर बाबू किशनदा के फ़िकरे, आदतें और परंपराएँ निभाते हैं, पर किशनदा कुँआरे थे और यशोधर बाबू गृहस्थ हैं।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझना:
यह प्रश्न मनोहर श्याम जोशी की कहानी ‘सिल्वर वैडिंग’ (वितान भाग 2) से है। किशनदा (कृष्णानंद पांडे) ने दिल्ली आए मैट्रिक पास यशोधर पंत को अपने क्वार्टर में शरण दी, नौकरी दिलवाई और दफ़्तरी जीवन में मार्गदर्शन किया। कथन से सहमति या असहमति लगभग 100 शब्दों में तर्क के साथ लिखनी है।

चरण 2: तर्क के बिंदु:
सहमति – यशोधर बाबू किशनदा को ‘मर्यादा पुरुष’ मानते हैं, उन्हीं के शब्दों और लहजे में बात करते हैं, उन्हीं की तरह मंदिर जाते हैं, लाल गमछा पहनते हैं और उनकी परंपराएँ निभाते हैं। असहमति – किशनदा कुँआरे थे, जबकि यशोधर बाबू गृहस्थ हैं और परिवार से टकराव झेलते हैं।

चरण 3: आदर्श उत्तर:
मैं इस कथन से काफ़ी हद तक सहमत हूँ। झेंपते हुए खुश होने की अदा, ‘तब की तब देखी जाएगी’ जैसे फ़िकरे और ‘मूरख लोग मकान बनाते हैं, सयाने उनमें रहते हैं’ जैसी उक्ति – सब उन्होंने किशनदा से ली हैं। वे किशनदा की तरह रोज़ मंदिर जाते हैं, संध्या-पूजा करते हैं, घर में होली गवाते हैं और जनेऊ बदलवाने के लिए कुमाउँनियों को बुलाते हैं। ध्यान में बैठते हैं, तो भी उन्हें किशनदा ही दिखते हैं। फिर भी वे पूरी तरह किशनदा नहीं हैं; वे गृहस्थ हैं और बच्चों से आदर व सलाह की आशा में दुखी रहते हैं।

अंतिम उत्तर:
यशोधर बाबू का आचरण बहुत हद तक किशनदा की प्रतिच्छाया है, पर गृहस्थ होने के कारण उनका अपना द्वंद्व भी है।
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