Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

“यशोधर जी चाहते हैं कि उन्हें समाज का सम्मानित बुजुर्ग माना जाए।” ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी में यह कथन किस संदर्भ में आया है ? इस कथन के संदर्भ में यशोधर बाबू के मनोभावों को स्पष्ट कीजिए। क्या यशोधर बाबू की ऐसी चाह अनुचित है ?

Show Hint

किशनदा की परंपराओं (होली गवाना, जनेऊ बदलवाना, रामलीला की तालीम) और घरवालों की नापसंदगी से संदर्भ लिखिए। फिर सलाह न लिए जाने की पीड़ा और चाह के औचित्य पर अपना मत दीजिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘सिल्वर वैडिंग’ मनोहर श्याम जोशी की कहानी है, जो ‘वितान भाग-2’ में है। इसके नायक यशोधर बाबू अपने आदर्श किशनदा की परंपराओं को निभाने वाले व्यक्ति हैं।

चरण 2: कथन का संदर्भ:
किशनदा के चले जाने के बाद यशोधर बाबू ने उनकी कई परंपराएँ जीवित रखीं, जैसे घर में होली गवाना, ‘जन्यो पुन्यूं’ के दिन सब कुमाउँनियों को जनेऊ बदलने के लिए घर बुलाना और रामलीला की तालीम के लिए क्वार्टर का एक कमरा देना। पत्नी और बच्चों को इन आयोजनों का खर्च और शोर दोनों नापसंद थे और समाज में भी इनके लिए उत्साह नहीं बचा था। इसी प्रसंग में कहा गया है कि यशोधर जी समाज का सम्मानित बुजुर्ग माने जाना चाहते हैं, पर जब समाज ही न हो तो यह पद उन्हें कैसे मिले।

चरण 3: यशोधर बाबू के मनोभाव:
वे चाहते हैं कि बच्चे उनका आदर करें और हर बात में उनसे वैसे ही सलाह लें जैसे वे स्वयं किशनदा से लेते थे। वे अपनी बात थोपना नहीं चाहते, पर कहते हैं कि एक बार पूछ तो लिया करो, क्योंकि अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता। बच्चों के रूखे उत्तर से उनके मन में उपेक्षा, अकेलेपन और दुख का भाव जागता है।

चरण 4: आदर्श उत्तर (लगभग 100 शब्द):
यह कथन उस प्रसंग में आया है जब यशोधर बाबू किशनदा से विरासत में मिली परंपराएँ, जैसे होली गवाना, जनेऊ बदलवाना और रामलीला की तालीम, निभाते हैं, पर पत्नी-बच्चे इनके खर्च और शोर से चिढ़ते हैं और समाज में भी इनके लिए उत्साह नहीं रहा। यशोधर बाबू चाहते हैं कि बच्चे उनका आदर करें और हर बात में सलाह लें। उनकी उपेक्षा से वे दुखी और अकेले हैं। उनकी यह चाह अनुचित नहीं है, क्योंकि बड़ों का आदर और उनके अनुभव का लाभ लेना स्वाभाविक है। पर उन्हें भी बदलते समय को समझकर नई पीढ़ी से तालमेल रखना चाहिए।

अंतिम उत्तर:
सम्मान और सलाह की चाह स्वाभाविक और उचित है, पर उसके साथ बदलते समय से सामंजस्य भी ज़रूरी है।
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