Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

यशोधर बाबू एक ओर अपने बच्चों की तरक्की से खुश भी होते हैं तो दूसरी ओर उन्हें उनकी यह तरक्की ‘समहाउ इंप्रापर’ भी लगती है। उनके व्यवहार के इस विरोधाभास को ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

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यशोधर बाबू की खुशी के कारण और ‘समहाउ इंप्रापर’ लगने के कारण दोनों लिखिए, फिर कहानी की किसी घटना का उदाहरण दीजिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: संदर्भ:
‘सिल्वर वैडिंग’ मनोहर श्याम जोशी की कहानी है (आरोह भाग-2)। यशोधर बाबू एक सरकारी दफ़्तर के सेक्शन अफ़सर हैं, जो पुराने मूल्यों से गहरे जुड़े हैं। उनके बच्चे बड़े पदों पर पहुँच गए हैं और आधुनिक जीवन जी रहे हैं।

चरण 2: खुशी का पक्ष:
यशोधर बाबू को गर्व है कि उनके बेटे अच्छी नौकरियों में हैं, बेटी पढ़-लिखकर आगे बढ़ रही है और घर में आर्थिक सुख आ गया है। एक पिता के रूप में वे बच्चों की उन्नति से संतुष्ट हैं।

चरण 3: ‘समहाउ इंप्रापर’ का पक्ष:
दूसरी ओर बच्चों का आचरण, उनके कपड़े, खर्चीला रहन-सहन और पिता को बिना पूछे निर्णय लेना उन्हें अनुचित लगता है। बेटे की अधिक तनख़्वाह उन्हें असहज करती है। वे सोचते हैं कि जीवन-मूल्य और सादगी पीछे छूट रहे हैं। यही उनके व्यवहार का विरोधाभास है।

अंतिम उत्तर:
यशोधर बाबू बच्चों की तरक्की से खुश हैं, पर पीढ़ी के बदलते मूल्यों के कारण उसे ‘समहाउ इंप्रापर’ भी मानते हैं।
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