Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

नए युग के वे कौन-से मानक थे जिनसे यशोधर बाबू की असहमति थी और क्यों ? नए युग के उन मानकों की वर्तमान संदर्भों में प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।

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यशोधर बाबू को दिखावे और भौतिकता वाले नए मानक पसंद नहीं थे। आज उनके अच्छे पक्ष अपनाकर संतुलन रखना ज़रूरी है।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘सिल्वर वैडिंग’ मनोहर श्याम जोशी की कहानी है, जो ‘आरोह भाग 2’ में है। यशोधर बाबू पुराने संस्कारों वाले व्यक्ति हैं और अपनी विवाह की पच्चीसवीं वर्षगाँठ के अवसर पर उनके बच्चे नए ढंग से उत्सव मनाना चाहते हैं।

चरण 2: असहमति के मानक:
यशोधर बाबू को अपने बच्चों का आधुनिक पहनावा, पार्टी और केक-कटिंग जैसे आयोजन, खर्चीली जीवन-शैली और घर के बुज़ुर्गों की राय की अनदेखी पसंद नहीं थी। वे सादगी, संयम, परिवार की मर्यादा और किशनदा से सीखे मूल्यों को सही मानते थे। इसलिए नए तौर-तरीक़े उन्हें अपने संस्कारों के विरुद्ध लगते थे।

चरण 3: वर्तमान में प्रासंगिकता:
आज के संदर्भ में नए मानकों का कुछ महत्त्व है। इनमें आत्मनिर्भरता, बेहतर जीवन-स्तर, महिलाओं की स्वतंत्रता और पुराने बंधनों से मुक्ति अच्छे परिवर्तन हैं। परंतु अत्यधिक भौतिकता, दिखावा और रिश्तों में बढ़ती दूरी चिंता का विषय है।

चरण 4: उत्तर (लगभग 100 शब्द):
यशोधर बाबू को नई पीढ़ी का खुलापन, भौतिक सुविधाओं का दिखावा, पार्टी-संस्कृति और बड़ों की उपेक्षा पसंद नहीं थी, क्योंकि वे सादगी, संयम और पारिवारिक मर्यादा को श्रेष्ठ मानते थे। फिर भी आज के समय में नए मानकों में समानता, आत्मनिर्भरता और प्रगतिशील सोच जैसे सकारात्मक पक्ष भी हैं, जो समाज के विकास के लिए ज़रूरी हैं। आवश्यकता इस बात की है कि नए और पुराने मूल्यों में संतुलन रखा जाए ताकि प्रगति के साथ संवेदना भी बनी रहे।

अंतिम उत्तर:
यशोधर बाबू को दिखावे और भौतिकता वाले नए मानक अपने सादगी-भरे मूल्यों के विरुद्ध लगे, परंतु उनके प्रगतिशील पक्ष आज भी प्रासंगिक हैं।
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