Question:

यशोधर बाबू के परिवार में विचारों की भिन्नता के बावजूद अधिकांश एक ही छत के नीचे रह रहे हैं – इसका क्या कारण रहा होगा? क्या वर्तमान परिवारों में भी यह परंपरा देखी जा सकती है? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

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संयुक्त परिवार या पारिवारिक संबंधों पर लिखते समय सामाजिक संरचना, आर्थिक पक्ष और सांस्कृतिक जड़ों को अवश्य जोड़ें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

यशोधर बाबू के परिवार में अलग-अलग पीढ़ियों के विचार, सोच और जीवन दृष्टि में मतभेद स्वाभाविक हैं — जैसे पुरानी पीढ़ी परंपरा और अनुशासन को महत्व देती है, तो नई पीढ़ी आधुनिक सोच और स्वतंत्रता की पक्षधर होती है।
इसके बावजूद सब एक ही छत के नीचे साथ रहते हैं, इसका सबसे बड़ा कारण है पारिवारिक मूल्य, आपसी स्नेह और आर्थिक, सामाजिक संरक्षण की भावना।
भारत में संयुक्त परिवार की परंपरा इस बात को दर्शाती है कि मतभेदों के बावजूद परिवार के सदस्य संकट या जरूरत के समय साथ खड़े रहते हैं।
वृद्ध माता-पिता, छोटे बच्चे, बेरोजगार युवा — ये सभी एक ही परिवार में रहते हुए परस्पर सहयोग और आदरभाव से जीवन जीते हैं। यशोधर बाबू के परिवार में भी यही भाव प्रबल है।
वर्तमान समय में शहरीकरण, नौकरी की मांग और व्यक्तिगत स्वावलंबन के चलते संयुक्त परिवारों में कमी आई है, पर कई परिवार आज भी विशेष अवसरों, त्योहारों और संकट के समय एकजुट होते हैं।
इसके अलावा गाँवों और कस्बों में आज भी संयुक्त परिवार की जड़ें गहरी हैं।
अतः कहा जा सकता है कि यशोधर बाबू का परिवार भारतीय परिवार व्यवस्था की परंपरा का उदाहरण है जो भिन्न विचारों को सहिष्णुता, संवाद और प्रेम से एक सूत्र में बाँधे रखता है।
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