विशेष लेखन की भाषा–शैली सामान्य लेखन से अलग कैसे है ?
विशेष लेखन में विषय की जटिलता, गहराई और वैज्ञानिकता होती है, इसलिए उसकी भाषा-शैली कुछ भिन्न होती है:
(a) विषय के अनुरूप विश्लेषणात्मक एवं सूचनात्मक शैली का प्रयोग होता है।
(b) शब्द चयन सटीक, गंभीर और तकनीकी होता है।
(c) पाठकों को तथ्य और निष्कर्ष दोनों एकसाथ देने की अपेक्षा होती है।
(d) सामान्य लेखन में सरस भाषा का प्रयोग होता है, जबकि विशेष लेखन में तार्किक प्रस्तुति प्रमुख होती है।
संगतकार' कविता के संदर्भ में लिखिए कि संगतकार जैसे व्यक्तियों के व्यक्तित्व से युवाओं को क्या प्रेरणा मिलती है। किन्हीं दो का वर्णन कीजिए।
'मैं क्यों लिखता हूँ?' पाठ के आधार पर प्रत्यक्ष अनुभव और अनुभूति को स्पष्ट करते हुए लेखक पर पड़ने वाले इनके प्रभाव को लिखिए। आप दोनों में से किसे महत्त्व देते हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
'साना-साना हाथ जोड़ि...' पाठ में प्रकृति की विराटता का दर्शन है।' - पाठ के दृश्यों के आधार पर इसे स्पष्ट करते हुए लिखिए।
'माता का अँचल' पाठ से बच्चों के किन्हीं दो खेलों और उनके परिवेश का अंतःसंबंध स्पष्ट करते हुए टिप्पणी लिखिए।
फागुन की मनोहारिता मनुष्य के मन पर क्या प्रभाव डालती है? 'अट नहीं रही है' कविता के आधार पर लिखिए।