Question:

सूरदास के चरित्र की विशेषताओं का वर्णन करते हुए लिखिए कि आप उनमें से किन को अपनाना चाहेंगे और क्यों? (कम-से-कम तीन विशेषताओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए) 
 

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चरित्र की व्याख्या करते समय यह ज़रूरी है कि उनके गुणों को अपने जीवन से जोड़ा जाए — यही साहित्य का उद्देश्य है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘सूरदास की झोंपड़ी’ पाठ में सूरदास एक अंधा व्यक्ति है, परंतु उसका आत्मबल, विवेक और दृष्टिकोण एक समर्थ व्यक्ति से कहीं अधिक है। वह अंधा होते हुए भी अन्याय का विरोध करता है, समाज में अपनी पहचान बनाए रखता है और झोंपड़ी के अधिकार के लिए संघर्ष करता है। उसका चरित्र अत्यंत प्रेरणादायी है।
मैं सूरदास की तीन प्रमुख विशेषताओं को अपनाना चाहूँगा:
1. आत्मसम्मान और अधिकारबोध:
सूरदास अंधा होते हुए भी यह समझता है कि उसकी झोंपड़ी उसका अधिकार है और कोई उसे बिना उचित कारण वहाँ से नहीं हटा सकता। वह अपनी कमजोरियों को कभी दूसरों की दया पर नहीं छोड़ता। यह आत्मसम्मान जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है। मैं इस गुण को इसलिए अपनाना चाहूँगा क्योंकि आज के समाज में जब लोग छोटी-छोटी बातों पर समझौता कर लेते हैं, तब आत्मसम्मान और अधिकार के लिए डटे रहना साहस का कार्य है।
2. विवेक और व्यावहारिक चतुराई:
सूरदास अपने विरोधियों से सीधे नहीं टकराता, बल्कि व्यावहारिक चतुराई से अपनी बात कहता है। वह अधिकारियों से भी तार्किक ढंग से बात करता है और उन्हें नैतिक रूप से झकझोरता है। यह गुण हर व्यक्ति को कठिन परिस्थिति में बचाव करने का मार्ग देता है। मैं इस गुण को इसलिए अपनाना चाहूँगा ताकि किसी भी संकट में धैर्यपूर्वक और चतुराई से स्थिति को संभाल सकूँ।
3. सहनशीलता और संतुलित दृष्टिकोण:
सूरदास पर अन्याय होता है, पर वह गुस्से, हिंसा या प्रतिशोध की भावना से नहीं भरता। वह शांतिपूर्वक और गरिमा के साथ परिस्थिति का सामना करता है। आज की दुनिया में सहनशीलता और संतुलन की भारी आवश्यकता है, जहाँ व्यक्ति छोटी बातों पर भी आक्रामक हो जाता है।
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