Question:

‘सूरदास में सरलता भी है और व्यावहारिक चतुराई भी’ — ‘सूरदास की झोंपड़ी’ पाठ के आधार पर इस दृष्टि से उसके व्यक्तित्व का विश्लेषण कीजिए। 
 

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चरित्र-विश्लेषण करते समय केवल गुण-दोष नहीं, बल्कि उसकी घटनाओं में प्रतिक्रिया, संवाद और दृष्टिकोण का भी विश्लेषण करें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘सूरदास की झोंपड़ी’ में सूरदास एक अंध दृष्टिहीन व्यक्ति है, लेकिन उसमें गहरी समझ, अनुभव और व्यवहारिक बुद्धिमत्ता है। वह पक्का गायक नहीं, पर भक्ति से पूर्ण है। उसकी दृष्टिहीनता उसकी दूरदृष्टि को बाधित नहीं करती।
सरलता के रूप में वह किसी से द्वेष नहीं करता, अपनी झोंपड़ी में संतोषी जीवन बिताता है और अपने आसपास की घटनाओं को बड़ी सहजता से स्वीकार करता है। वह किसी पर आरोप नहीं लगाता, न ही किसी को दुख देता है।
परंतु, उसकी व्यावहारिक चतुराई तब दिखाई देती है जब वह गाँव के मुखिया और अधिकारियों से संवाद करता है। वह बिना टकराव के, अपनी बातें रखता है — जैसे मंदिर की सीढ़ियों पर बैठने से संबंधित बात, या भूमि पर अधिकार। वह जानता है कि कब चुप रहना है और कब बोलना।
सूरदास का यह संतुलनशील और आत्मसम्मानी व्यक्तित्व उसे साधारण ग्रामीण से ऊपर उठाकर एक नैतिक प्रतीक बना देता है। लेखक उसे ‘झोंपड़ी वाला तपस्वी’ की तरह प्रस्तुत करता है।
निष्कर्ष:
सूरदास केवल एक पात्र नहीं, बल्कि सादगी, धैर्य, और व्यवहारिक बुद्धिमत्ता का प्रतीक है। वह समाज को बिना शोर किए एक ऐसा दर्पण देता है जिसमें संवेदना और विवेक दोनों का प्रतिबिंब है।
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