Question:

‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ के आधार पर लिखिए कि जाति आधारित श्रम विभाजन का देश के आर्थिक पहलू पर क्या प्रभाव पड़ता है। 
 

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आर्थिक विषयों में "संसाधन", "उत्पादकता", "विकास", जैसे शब्दों का प्रयोग करें — इससे उत्तर विश्लेषणात्मक बनता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

जाति आधारित श्रम विभाजन से देश की आर्थिक संरचना पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब श्रम का निर्धारण जन्म आधारित हो जाए — अर्थात जाति के आधार पर तय हो कि कौन क्या कार्य करेगा — तब प्रतिभा, दक्षता और नवाचार की संभावना समाप्त हो जाती है।
‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ में यह बताया गया है कि यह प्रणाली सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास — दोनों की बाधा बन जाती है। जो कार्यकर्ता कुशल होते हैं, उन्हें अवसर नहीं मिलता क्योंकि उनका जातिगत दर्जा उन्हें रोके रखता है। इससे उत्पादन क्षमता घटती है, और देश की उत्पादकता पर भी असर पड़ता है।
इसके अतिरिक्त, जातिगत श्रम विभाजन से सामाजिक विभाजन भी गहराता है — जिससे संसाधनों का असमान वितरण होता है और एक बड़े तबके को आर्थिक प्रगति से वंचित रहना पड़ता है।
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