रोला छन्द में कुल कितने चरण होते हैं ?
Step 1: संदर्भ.
हिंदी छन्दों में 'रोला छन्द' एक प्रसिद्ध मात्रिक छन्द है। इसका प्रयोग विशेषतः कवित्त और गीतों में किया जाता है।
Step 2: छन्द की संरचना.
रोला छन्द में कुल चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं। पहले दो चरण एक समान और बाद के दो चरण समान लय में रहते हैं।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः रोला छन्द में कुल चार चरण होते हैं।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'रोला' छंद के प्रत्येक चरण में मात्राएँ होती हैं:
"यह सम मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं। 11 और 13 मात्राओं पर यति होती है।" यह लक्षण किस छंद का है?
"लिखकर लोहित लेख, डूब गया दिनमणि अहा। व्योम सिन्धु सखि देख, तारक बुदबुद दे रहा।।" उपयुक्त पंक्तियों में प्रयुक्त छंद है
रोला किस प्रकार का छन्द है ?
सोरठा' छन्द के पहले एवं तीसरे चरण में मात्राएँ होती हैं