Comprehension

मन खाली नहीं रहना चाहिए, इसका मतलब यह नहीं है कि वह मन बंद रहना चाहिए। जो बंद हो जाएगा, वह शून्य हो जाएगा। शून्य होने का अधिकार बस परमात्मा का है जो सनातन भाव से संपूर्ण है। शेष सब अपूर्ण है। इससे मन बंद नहीं रह सकता। सब इच्छाओं का निरोध कर लोगे, यह झूठ है और अगर ‘इच्छानिरोधस्तप:’ का ऐसा ही नकारात्मक अर्थ हो तो वह तप झूठ है। वैसे तप की राह रेगिस्तान को जाती होगी, मोक्ष की राह वह नहीं है। ठाठ देकर मन को बंद कर रखना जड़ता है। लोभ का यह जीतना नहीं है कि जहाँ लोभ होता है, यानी मन में, वहाँ नकार हो ! यह तो लोभ की ही जीत है और आदमी की हार। आँख अपनी फोड़ डाली, तब लोभनीय के दर्शन से बचे तो क्या हुआ ? ऐसे क्या लोभ मिट जाएगा ? और कौन कहता है कि आँख फूटने पर रूप दीखना बंद हो जाएगा ? सच्चा ज्ञान सदा अपूर्णता के बोध को हम में गहरा करता है। सच्चा कर्म सदा इस अपूर्णता की स्वीकृति के साथ होता है।

Question: 1

गद्यांश के अनुसार ‘आँख फोड़ना’ का अभिप्राय है :

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लेखक के अनुसार लोभ से बचने के लिए आँख ही फोड़ लेना, यानी साधन को नष्ट करना, सही उपाय नहीं है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • शारीरिक विकलांगता को बढ़ावा देना
  • लोभ से बचने हेतु साधन को ही नष्ट कर देना
  • दृष्टि को स्थायी रूप से खो देना
  • तपस्या का सबसे उच्च स्थान प्राप्त करना
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश की पंक्ति:
गद्यांश में लिखा है, ‘आँख अपनी फोड़ डाली, तब लोभनीय के दर्शन से बचे तो क्या हुआ ? ऐसे क्या लोभ मिट जाएगा ?’
यहाँ लेखक कहता है कि लोभ से बचने के लिए कोई अपनी आँख ही नष्ट कर ले, तो भी लोभ नहीं मिटता।

चरण 2: अभिप्राय:
‘आँख फोड़ना’ का अर्थ यह है कि लोभ की वस्तु को देखने का साधन ही मिटा देना, ताकि लोभ न जागे। यह एक गलत उपाय है, क्योंकि लोभ मन में रहता है।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
(1) और (3) शारीरिक हानि की बात करते हैं, पर लेखक का आशय शारीरिक विकलांगता नहीं, बल्कि लोभ से बचने का नकारात्मक तरीका है। (4) तपस्या से जोड़ना गद्यांश के अनुसार गलत है, क्योंकि लेखक ने ऐसे तप को झूठ कहा है।

अंतिम उत्तर:
सही उत्तर विकल्प (2) लोभ से बचने हेतु साधन को ही नष्ट कर देना है।
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Question: 2

लेखक के अनुसार ‘मन को बंद कर देना’ क्यों सही नहीं है ?

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गद्यांश कहता है कि मन को बंद कर रखना जड़ता है। इसी कारण मन को बंद करना सही नहीं है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • इससे मन प्रतिष्ठित रूप से शांत हो जाता है।
  • इससे लोभ का नाश हो जाता है।
  • इससे मन जड़ हो जाता है।
  • इससे मन सपने देखना बंद कर देता है।
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश की पंक्ति:
गद्यांश में स्पष्ट लिखा है, ‘ठाठ देकर मन को बंद कर रखना जड़ता है।’ साथ ही कहा है कि जो बंद हो जाएगा, वह शून्य हो जाएगा।

चरण 2: कारण:
मन का स्वभाव इच्छा और गति है। उसे जबरदस्ती बंद करने से उसकी स्वाभाविक क्रियाशीलता रुक जाती है और वह जड़ बन जाता है। इसलिए लेखक इसे सही नहीं मानता।

चरण 3: अन्य विकल्पों की जाँच:
(1) मन शांत होने की बात गद्यांश में नहीं है। (2) लेखक कहता है कि मन बंद करने से लोभ का नाश नहीं होता, बल्कि लोभ की ही जीत होती है। (4) सपने देखने की बात गद्यांश में आई ही नहीं।

अंतिम उत्तर:
मन को बंद करना इसलिए गलत है कि इससे मन जड़ हो जाता है। सही उत्तर (3)।
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Question: 3

गद्यांश के अनुसार ‘सच्चा ज्ञान’ किस प्रकार की भावना से प्राप्त हो सकता है ?

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गद्यांश का अंतिम भाग कहता है कि सच्चा ज्ञान अपूर्णता के बोध को गहरा करता है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • पूर्णता की भावना से
  • अपूर्णता के बोध से
  • पूर्णता के नाश से
  • मनमानी छूट से
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश की पंक्ति:
गद्यांश के अंत में लिखा है, ‘सच्चा ज्ञान सदा अपूर्णता के बोध को हम में गहरा करता है।’

चरण 2: अर्थ:
लेखक के अनुसार जो व्यक्ति स्वयं को पूर्ण मान लेता है, वह सीखता नहीं। सच्चा ज्ञान तब मिलता है जब हमें अपनी कमी और अधूरेपन का एहसास हो। पूर्णता केवल परमात्मा का अधिकार है, बाकी सब अपूर्ण हैं।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
(1) पूर्णता की भावना गद्यांश में परमात्मा के लिए कही गई है, मनुष्य के ज्ञान के लिए नहीं। (3) पूर्णता का नाश कोई उपाय नहीं बताया गया। (4) मनमानी छूट का गद्यांश में खंडन है।

अंतिम उत्तर:
सच्चा ज्ञान अपूर्णता के बोध से प्राप्त होता है। सही उत्तर (2)।
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Question: 4

गद्यांश के अनुसार लोभ से बचने का क्या उपाय है ?

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मन को बंद करना जड़ता है और इच्छा पूरी करते जाना लोभ बढ़ाता है। इसलिए संयम ही उपाय है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • मन को बंद रखना
  • मन को भरा रखना
  • मन को संयमित रखना
  • मन की इच्छा पूरी करना
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश का केंद्रीय विचार:
लेखक कहता है कि इच्छाओं को पूरी तरह बंद कर देना झूठा तप है और लोभ का सच्चा जीतना भी नहीं है। साथ ही मन को खुला छोड़कर मनमानी करने देना भी ठीक नहीं है, क्योंकि सच्चा कर्म अपूर्णता को स्वीकार करके होता है।

चरण 2: बीच का रास्ता:
इन दोनों छोरों के बीच का उपाय यही बचता है कि मन न बंद हो, न बेलगाम हो। अर्थात मन संयमित रहे।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
(1) मन को बंद रखना गद्यांश में जड़ता कहा गया है, इसलिए गलत है। (2) मन को भरा रखना लोभ से बचने का उपाय गद्यांश में नहीं बताया गया है। (4) इच्छा पूरी करते जाना तो लोभ को बढ़ाता है।

अंतिम उत्तर:
लोभ से बचने का उपाय मन को संयमित रखना है। उत्तर (3)।
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Question: 5

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

I. लोभ का नकार ही लोभ की जड़ है और यह व्यक्ति की हार है।

II. लोभ को दबाना ही उसे जीतना है।

III. संयमित मन ही लोभ पर विजय पा सकता है।

इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?

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गद्यांश की पंक्ति ‘यह तो लोभ की ही जीत है और आदमी की हार’ देखिए। इससे कथन II ग़लत सिद्ध होता है और कथन I सही।
Updated On: Oct 27, 2026
  • कथन I सही है, कथन II ग़लत है।
  • कथन I ग़लत है, कथन II सही है।
  • कथन I और III सही हैं।
  • कथन II और III सही हैं।
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The Correct Option is C

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चरण 1: गद्यांश का प्रसंग समझिए:
यह गद्यांश जैनेंद्र कुमार के निबंध ‘बाज़ार दर्शन’ से है। इसमें लेखक कहता है कि मन को बंद कर देना या इच्छाओं का नकार कर देना लोभ को जीतना नहीं है।

चरण 2: कथन I की जाँच:
गद्यांश में लिखा है, ‘लोभ का यह जीतना नहीं है कि जहाँ लोभ होता है, यानी मन में, वहाँ नकार हो ! यह तो लोभ की ही जीत है और आदमी की हार।’ इसलिए कथन I गद्यांश के भाव से मेल खाता है, अतः सही है।

चरण 3: कथन II की जाँच:
कथन II कहता है कि लोभ को दबाना ही उसे जीतना है। गद्यांश के अनुसार मन को बंद रखना जड़ता है और इच्छाओं का नकारात्मक निरोध झूठा तप है। इसलिए कथन II ग़लत है।

चरण 4: कथन III की जाँच:
गद्यांश कहता है कि मन खाली या बंद नहीं रहना चाहिए और सच्चा कर्म अपूर्णता की स्वीकृति के साथ होता है। यह संतुलित, संयमित मन की ओर संकेत करता है जो लोभ का सामना करके उस पर विजय पाता है। इसलिए कथन III सही है।

चरण 5: विकल्पों से मिलान:
केवल I और III सही हैं, II ग़लत है। यह बात विकल्प 3 में कही गई है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 3 : कथन I और III सही हैं।
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