हो जाए न पथ में रात कहीं,
मंज़िल भी तो है दूर नहीं –
यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है !
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है !
बच्चे प्रत्याशा में होंगे,
नीड़ों से झाँक रहे होंगे –
यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है !
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है !
मुझसे मिलने को कौन विकल ?
मैं होऊँ किसके हित चंचल ?
यह प्रश्न शिथिल करता पद को, भरता उर में विह्वलता है !
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है !
बच्चों का नीड़ों से झाँकने का संभावित कारण है :
दिन ढलते ही घर की ओर लौटती चिड़िया के परों में चंचलता है तो कवि के कदमों में :
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
कथन : चिड़िया शीघ्रातिशीघ्र अपनी मंज़िल तक पहुँचना चाहती है।
कारण : गहराती संध्या उसे उसके बच्चों के लिए चिंतित कर रही है।
विकल्प :
काव्यांश के मूल भाव को स्पष्ट करने वाला/वाले कथन है/हैं :
I. बीता हुआ समय लौटकर नहीं आता।
II. गतिशील समय के साथ चलते हुए लक्ष्य प्राप्ति के लिए संघर्ष करना चाहिए।
III. अपनों से मिलन की आशा हमारे प्रयासों में तीव्रता लाती है।
उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ – कथन की आवृत्ति संकेत करती है :